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शिकवा_शिकायत
कोई शिकवा कोई अब शिकायत नही
जिंदगी सितम तेरे ,कम इनायत नही
बात इश्क की थी ,,तो सज़दा कर लिया वरना😜
सर झुकाने की मुझको तो आदत नही 😝😝😜😜
काफिर करार कर दिया सच बोलना मुझे
किरदार में मेरे झूठ की नजाकत नही
कदम बढ़ते रहे सदा ,कांटे मिले या फूल
हार के बैठ जाना .....मेरी फितरत नही
घबरा के बुझते रहे हवा के झोंके से वो दीप
अँधेरे से लड़ने की जिनकी ....हिम्मत नही
मुखौटे लगे है चेहरे पर शराफत ईमान के
इंसां के अंदर का इंसान ही सलामत नही
हँस रहा है ,शीशे की तरह टुटा वो बहुत होगा
ज़बान -ए-अश्क की पत्थरों को तो आदत नही
छोटी सी जिंदगी है मगर मेरी पहचान हो तुम
मुझे झूठी शोहरतों की मुझे कोई चाहत नही..!!!!"
Akash Gupta
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