Hindi Quote in Religious by Deepak Vyas

Religious quotes are very popular on BitesApp with millions of authors writing small inspirational quotes in Hindi daily and inspiring the readers, you can start writing today and fulfill your life of becoming the quotes writer or poem writer.

.
श्राद्ध को मूर्खता कहने वालों
हमारे धर्म में श्राद्ध का रहस्य जानो.

क्या हमारे ऋषि मुनि पागल थे,
जो कहते थे कि
कौवों को खिलाएंगे तो
हमारे पूर्वजों को मिल जाएगा.

हमारे ऋषि मुनियों के
क्राँतिकारी विचारों के पीछे
यह है सही कारण 👇

तुमने किसी भी दिन
पीपल और बरगद के पौधे लगाए हैं ?
या किसी को लगाते हुए देखा है ?
क्या पीपल या बड़ के बीज मिलते हैं ?

बरगद या पीपल की कलम
जितनी चाहे रोपो, परंतु
लगती क्यों नहीं ?

वास्तव में इन दोनों वृक्षों के टेटे
कौवे खाते हैं , और उनके पेट में ही
बीज की प्रोसेसींग होती है , और
तब जाकर बीज उगने लायक होते हैं.
उसके पश्चात कौवे
जहाँ-जहाँ बीट करते हैं,
वहीँ पर यह दोनों वृक्ष उगते हैं.
अर्थात ... यह दोनों वृक्ष उगाना
बिना कौवे के संभव नहीं है, इसलिए
कौवे को बचाना जरूरी है.

मादा कौआ भादो महीने में ही
अंडा देती है , और बच्चा पैदा होता है.
इस नयी पीढ़ी को पौष्टिक और
भरपूर आहार मिलना जरूरी है ,
इसलिए ऋषि मुनियों ने कौवों के
नवजात बच्चों के लिए हर छत पर
श्राघ्द के रूप में पौष्टिक आहार की
व्यवस्था कर दी, जिससे कि
कौवों की नई जनरेशन का
पालन पोषण हो जाये.

इसलिए .... दिमाग को दौड़ाए बिना
श्राघ्द कीजिए
जो प्रकृति के रक्षण के लिए
नितांत आवश्यक है.

घ्यान रहे ...
जब भी बरगद और पीपल को देखो तो
अपने पूर्वजों को याद करो, क्योंकि
उन्होंने श्राद्ध दिया था, इसीलिए
यह दोनों उपयोगी पेड़ हम देख रहे हैं.

सनातन धर्म पर उंगली उठाने वालों,
याद रखना ... जब आपके विज्ञान का
'व' भी नहीं था, तब
हमारे सनातन को पता था कि
किस बीमारी का इलाज क्या है,
कौन सी चीज खाने लायक है
कौन सी नहीं...?
अथाह ज्ञान का भंडार है
हमारा सनातन और उनके नियम,

मैकाले के शिक्षा पद्धति में पढ़ कर
अपने पूर्वजों, ऋषि मुनियों के नियमों पर
ऊँगली उठाने के बजाय ,
उसकी गहराई और हमारे धर्म के
रहस्य जानने की कोशिश करो.
___________________________
शिव शुक्ल 'शिशु' की
🌹 ꧁!! राम राम जी !!꧂ 🌹
.

Hindi Religious by Deepak Vyas : 111833091
New bites

The best sellers write on Matrubharti, do you?

Start Writing Now