इस नीले समुद्र और
नीले आकाश पर
आम आदमी के लाल-गाढ़े
ख़ून से लिखे हुए
वो रहस्य हैं --
जो समुद्र की उछालों के साथ
गुम होकर --
बरसात के पानी के साथ
नीचे बरस पड़ते हैं --
औ---र---
हम सबको इनमें
डूबना पड़ता है ---
फिर से समुद्र की उछालों में
खो जाने के लिए --
हम एक और 'नाम'
एक और परिभाषा ढूंढते हैं --
और फिर से
नाकाम हो जाते हैं --
डॉ.प्रणव भारती
(मेरे उपन्यास 'अपंग' से )