सभी श्री गणेश भक्तों को संध्या वंदन मंगलवार ब्रह्मदत्त त्यागी हापुड़ एवं सभी भक्तों का प्रथम पूजनीय श्री गणेश को एवं हनुमान जी को अंगारक संकष्टी चतुर्थी संध्याकाल पर प्रणाम नमन नमस्कार है,आओ स्तुति करें भगवान श्री गणेश एवं हनुमान जी आरती की
👉➖श्री गणेशजी की आरती➖
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा ॥ x2
एकदन्त दयावन्त चारभुजाधारी
माथे पर तिलक सोहे मूसे की सवारी x2
(माथे पर सिन्दूर सोहे, मूसे की सवारी)
पान चढ़े फूल चढ़े और चढ़े मेवा
(हार चढे, फूल चढ़े और चढ़े मेवा)
लड्डुअन का भोग लगे सन्त करें सेवा ॥ x2
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा ॥
अँधे को आँख देत कोढिन को काया
बाँझन को पुत्र देत निर्धन को माया । x2
'सूर' श्याम शरण आए सफल कीजे सेवा
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा ॥ x2
(दीनन की लाज राखो, शम्भु सुतवारी )
(कामना को पूर्ण करो, जग बलिहारी ॥)
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा ॥
प्रस्तुतकर्ता ब्रह्मदत्त त्यागी हापुड़
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सभी श्री गणेश भक्तों को संध्या वंदन मंगलवार ब्रह्मदत्त त्यागी हापुड़ एवं सभी भक्तों का प्रथम पूजनीय श्री गणेश को एवं हनुमान जी को अंगारक संकष्टी चतुर्थी संध्याकाल पर प्रणाम नमन नमस्कार है,आओ स्तुति करें भगवान श्री गणेश एवं हनुमान जी आरती की
🔔🔔🔔🔔"हनुमान जी आरती" 'ब्रह्मदत्त त्यागी हापुड़ "🔔🔔🔔🔔
आरती कीजे हनुमान लला की, दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।
जाके बल से गिरिवर कांपे, रोग दोष जाके निकट न झांके ।
अंजनी पुत्र महा बलदाई, संतन के प्रभु सदा सहाई ।
दे वीरा रघुनाथ पठाये, लंका जारि सिया सुधि लाई ।
लंका सी कोट समुद्र सी खाई, जात पवन सुत बार न लाई।
लंका जारि असुर सब मारे, राजा राम के काज संवारे ।
लक्ष्मण मूर्छित परे धरनि पे, आनि संजीवन प्राण उबारे ।
पैठि पताल तोरि यम कारे, अहिरावन की भुजा उखारे ।
बाएं भुजा सब असुर संहारे, दाहिनी भुजा सब सन्त उबारे ।
आरती करत सकल सुर नर नारी, जय जय जय हनुमान उचारी ।
कंचन थार कपूर की बाती, आरती करत अंजनी माई ।
जो हनुमानजी की आरती गावै, बसि बैकुण्ठ अमर फल पावै ।
लंका विध्वंस किसो रघुराई, तुलसीदस स्वामी कीर्ति गाई।
प्रस्तुतकर्ता ब्रह्मदत्त त्यागी हापुड़