ज़िंदगी हर दिन कुछ नया सिखाती है।
कडवि है। पर हर रोज पिलाती है।
कुछ पल अच्छे लगते है । हसीन लगते है।
पर समझ पाना मुश्किल है।
ये ज़िंदगी है या तकदीर दिखाती है
बदलते दिनों के साथ आदत बादल जाती है
मरे हूये इंसान को और मार जाती है
ज़िंदगी हर दिन कुछ नया सिखाती है।
कितने लोग मिलते है कितने किसे बनते है
कोई तुमये जीना सिखाता है तो कोई मौत के फायेदे गिनाता है
हर साक्स का अपना नजरिया बन जाता है
बदलो का मन कभी भी बदल जाता है
कुछ डायरी पन्नो की पहचान बताती है
ज़िंदगी हर दिन कुछ नया सिखाती है।
ज़िंदगी हर दिन कुछ नया सिखाती है।
कल में गया था खुदी की पहचान करने
दुनिया में क्या कमी थी जो कुदरत ने मुझे बनाया
देखा लोगो को तो समझ में आया।
हर शाक्ष खुदको ना पहचान पाया।
जहा देखा वहा कुछ राज नजर आया।
सब कुछ है यहाँ गुमनामी का साया।
जीना सिखाती है, तो कुछ ना कुछ सिखाती है
कुछ है ऐसा जिसका एहसास हर किसी को कराती है
ज़िंदगी हर दिन कुछ नया सिखाती है।
ज़िंदगी हर दिन कुछ नया सिखाती है।
में बरसो बाद आज कुछ लिखने बैठा
मेरा कलम मुझसे रूठा बोल बरसो बाद मिले हो
तुम ना मेरे लिये बने हो । मुझे तो एक यार चाहिये
थोड़ा मुझे हुस्के हाथो का प्यार चाहिये।
तुमये तो कितने लोगो ने ठुकराया बाद में
तो तुमरा ये दोस्त ही याद आया चलो अब वादा करो
के दुनिया को कुछ करके दिखायेंगे तुम और हम मिलके
एक नई दुनिया बनायेगे।
जहा हमारे पास वाजा होगी,
तो लोगो की जुबा पे हमारी शायरी होगी,
तो ये ज़िंदगी कितनी हसीय होगी, हसीन होगी
ज़िंदगी हर दिन कुछ नया सिखाती है।
ज़िंदगी हर दिन कुछ नया सिखाती है।
- दीपक✍️🇮🇳💙