अमृतसर का स्वर्ण मंदिर तो सबको पता है, पर क्या आप दक्षिण के इस स्वर्ण मंदिर के बारे में जानते हैं?
दोस्तों स्वर्णमंदिर का ख्याल आते ही हमारे ज़हन में जो सबसे पहला नाम और आँखों के सामने सबसे पहला चित्र जो उभर कर आता है, वो है अमृतसर का 'श्री हरिमन्दिर साहिब' स्वर्णमंदिर !
जिसे सिक्खों के गुरु रामदास जी ने बनवाया था!
अमृतसर का स्वर्ण मंदिर तो सबको पता है ,,,,जिसके बारे में कहा जाता है कि पूरा अमृतसर शहर स्वर्णमंदिर के चारों तरफ बसा हुआ है, और अमृतसर शहर का नाम वास्तव में उस 'अमृत-सरोवर' के नाम पर ही रखा गया है, जिस सरोवर का निर्माण स्वयं सिखों के चौथे गुरु 'गुरु राम दास' जी ने स्वयं अपने हाथों से किया था, और यह गुरुद्वारा भी इसी सरोवर के बीचो-बीच स्थित है, इस गुरूद्वारे का बाहरी हिस्सा सोने का बना हुआ है, इसलिए इसे स्वर्णमंदिर के नाम से भी जाना जाता है!
लेकिन आज हम बात कर रहे है, दक्षिण भारत के स्वर्णमंदिर की!
दक्षिण भारत के तमिलनाडु में भी एक स्वर्णमंदिर है, जिसका नाम है श्रीपुरम!
यह मंदिर तमिलनाडु के वेल्लोर शहर के पास एक छोटी सी पहाड़ियों के तल पर 'श्रीपुरम आध्यात्मिक पार्क' के नाम से स्तिथ है, इस मंदिर में मुख्यतः श्री लक्ष्मी नारायण और देवी महालक्ष्मी की पूजा आरधना की जाती है!
यह मंदिर लगभग 200 बीघा भूमि पर फैला हुआ है ,,,
अगर अमृतसर के स्वर्ण मंदिर का बात किया जाए तो यहां पर केवल 750 किलो स्वर्ण की छतरी बनी हुई है जबकि तमिलनाडु के वेल्लोर में स्थित महालक्ष्मी के इस मंदिर में 20 गुना अधिक लगभग 15 हजार किलो शुद्ध सोना लगाया गया है!