भगवान श्री विष्णु रूप श्री कृष्ण को बारंबार प्रणाम नमन नमस्कार है ब्रह्मदत्त त्यागी हापुड़ एवं सभी का➖ शुभ बृहस्पतिवार वीरवार गुरुवार की हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई ब्रह्मदत्त त्यागी हापुड़ एवं समस्त भक्तों की तरफ से आप सभी को.... जय जय नारायण नारायण हरि हरि तेरी लीला प्रभु न्यारी न्यारी हरि हरि ➖ ब्रह्मदत्त त्यागी
गीता के अध्याय ०४/04 का श्लोक 7 : है ब्रह्मदत्त
यदा यदा ही धर्मस्य श्लोक का हिंदी अर्थ
यदा = जब
यदा= जब
हि = वास्तव में
धर्मस्य = धर्म की
ग्लानिः = हानि
भवति = होती है
भारत = हे भारत
अभ्युत्थानम् = वृद्धि
अधर्मस्य = अधर्म की
तदा = तब तब
आत्मानं = अपने रूप को रचता हूं
सृजामि = लोगों के सम्मुख प्रकट होता हूँ
अहम् = मैं
(भगवान श्री नारायण हरि विष्णु जग पालन कर्ता है ब्रह्मदत्त त्यागी हापुड़ एवं सभी भक्तों का आपको बारंबार प्रणाम नमन नमस्कार है)
गीता के अध्याय ०४/04 का श्लोक 8: है ब्रह्मदत्त
परित्राणाय= साधु पुरुषों का
साधूनां = उद्धार करने के लिए
विनाशाय = विनाश करने के लिए
च = और =
दुष्कृताम् = पापकर्म करने वालों का
धर्मसंस्थापन अर्थाय = धर्मकी अच्छी तरह से
स्थापना करने के लिए
सम्भवामि = प्रकट हुआ करता हूं
युगे युगे = युग-युग में
➖ प्रस्तुतकर्ता ब्रह्मदत्त त्यागी हापुड़