खूबसूरती सदा अपने स्वभाव मे
निहित होती है , बनावट, दिखावा
बाहरी प्रदर्शन केवल चित्ताकर्षण ही है |
"कुछ लोगो मे बचपन, बचपन मे ही प्राण त्याग देता है अथवा कहीं किसी कोने में अविकसित बीज छिपाये बैठा होता है जिसे देखने के लिए परमात्मा की नजर चाहिये,
उसमे पुन:फूटकर अंकुरबन पौध से वृक्ष बनने तक की संभावना होती है |"