मित्रता दिवस की ढेरों शुभकामनायें
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“सखी मेरी”
सखी मेरी, बस तुम ही तो हो
जिससे मैं कभी रुठ नहीं पाती
बहुत दूर मैं तुझसे छूट कर बैठी
बस एक तुझको भूल नहीं पाती
उलझन कितनी दिल में ठहरी
क्यों मैं तुमसे मन कह नहीं पाती
मान धरे कितने मेरे मन में मुझमें
बस एक तेरा साथ मनाने में
यादें कहाँ विस्मृत कर पाती हूँ
जब जग सारा मुझे छोड़ गया था
तुम ही तो हर पल छण में थे बैठे
जब व्यथित मन से जग छूट गया
समय चक्र सब उलझा कर गया
अब पार भवंर ला छोड़ा हमको
कोष-कपोल नये खिले जीवन में
इंद्रधनुष सरीखे रंग जीवंत कर
जिम्मेदारी सब ढो ली हम सब ने
पर समय चक्र के पार न जाऐंगे
सदियों के फासले इतने गहराये
वर्षों भी शायद मिल न पायेंगे
सखी मेरी.......
Rashmi Ranjan