दोस्ती
आज जब मैं कक्षा में गई तो मेरी अध्यापिका पहले ही आ चुकी थीं, मैंने देखा कि वह सभी छात्राओं से कापी जमा कर रहीं हैं । उन्होंने मुझे भी अपने पास आने को कहा और साथ में कापी लाने के लिए कहा । मैं उनके पास गई लेकिन कापी नहीं ले गई।
पूरी कक्षा के सामने कापी न लाने का कारण पूछा—“अनीता आज तुम गृह कार्य की कापी क्यों नहीं लाईं, चलो कक्षा कार्य की कापी दिखाओ।”
मैं शर्म की वजह से अपना मुँह ऊपर नहीं कर पा रही थी।
कुछ सहपाठियों ने मुझे बड़ी ही नफ़रत से देखा ।
मेरी अध्यापिका ने बड़ी सख़्ती से फिर कहा— क्या बात है तुम बताती क्यों नहीं…. मैं डर कर सहम गई…
तभी मेरी दोस्त नीति ने अध्यापिका को बताया कि वह अनीता की दोनों कापी अपने घर ले गई थी आज लाना भूल गई, मुझे तो अध्यापिका ने कुछ नहीं कहा उसे बेंच पर खड़े होने की सजा मिली ।
वह जानती थी कि मेरे पास कापी है ही नहीं, बाज़ार से कापी न आने के कारण मैं रफ़ कापी पर ही अपना काम कर रही थी ।
घर जाते समय मैंने उससे कहा कि तुमने ऐसा क्यों किया तो उसका जबाब था कि तुम मेरी दोस्त हो तुम्हें बचाने का मेरा फ़र्ज़ था इसी को तो दोस्ती कहते हैं और मेरे ऑंखें गीली हो गईं।