एक समय वो भी था जहां कोई चिंता ना फ़िक्र थी, वो मेरा बचपन था…..
"काल कलौती पीअर धोती, मेघा सारे पानी दे।
पानी दे गुड़धानी दे नाहिं त आपन नानी दे।
गगरी छुच्छी बैल पियासे मेघा सारे पानी दे।
अरे ललुआ पानी दे।
काल कलौती पीअर धोती, मेघा सारे पानी दे।
सावन की झमाझम बारिश की हार्दिक अनंत बधाई हों ।