जिंदगीमे अकसर एसा होता हैं,
कोई बेगाना पास तो
कोई अपना दुर होता हैं
रिस्तो के तानो बानो मे
उलझने बढ जाती हैं
कुछ रिस्ते सुलझ जाते है तो
कहीं गाठे पड जाती हैं
पर रिस्ता वही सच्चा होता है
जो दील से जुडा होता है
जिंदगीमे अकसर एसा होता हैं....
कई पहेलिया अनबुझी सी
मन पर जेसे एक बोझ सी
रिस्तो में दरारे जाने क्युं
पडती ही जाती हैं
अपना वही कहेलाता है
जो हर पल साथ नीभाता है.....
कुछ रिस्ते दुरिया मीटा देते हैं
कुछ रिस्ते अचानक से
जिंदगी मीटा देते है
याद वो हरपल रहेता है
जो दील मे बसर करता हैं
जिंदगी मे अकसर एसा होता हैं