जीवन मे अहमीयत कहाँ बची,
बचा सबकुछ ,बचे अपने ,
अपनो मे मैं कहाँ बची |
बोला बहुत बार खुश रह ,
तब भी लगा कही हूँ शायद मै !
मगर बेअर्थ थे वे शब्द मै न थी ! |
जहाँ काँप जाता था हृदय दूर जाने
की बात से ,आज दूर है , मौत की बातो
पर भी असर नही | नही!
नही !! हूँ मै ! नही तुझमे !! था सच यही,
है सच यही ||
#झूठ
#खुरच