उसने बड़े अदब से पूछा - “अगली मुलाक़ात कहाँ होगी?”
मैंने कहा आसमानों में, दो बादलों की टक़रार में।
भीनी माटी की ख़ुश्बू में।
खिड़की पे बारिश की बूँदों में।
मोगरे के फूलों में।
अदरक वाली कड़क मीठी चाय से उठते उस धूएँ में।
रहमान के किसी गाने की धून में ।
रुके हुए से ट्राफ़िक जाम में।
शर्ट के टूटे हुए बटन में।गहरे काले काजल में।
पहाड़ों में। बहते झरनों में।
कहीं साहिल तो कहीं किनारों में।
मौसम की बहारों में।