कुछ बुंदे बारिश की हम पर गिरी,
कुछ बुंदे बारिश की तुम पर भी गिरी,
भीगे हम भी थे उस बारीश में,
भीगे तुम भी थे उस बारीश में,
देखा शायद तुमने भी था हमे,
हमने तो सिर्फ तुमको निहारा था,
जज़्बात तुम्हारे सारे उन बूंदों को समर्पित थे,
भावनाए हमारी सारी बस तुमपर ही न्योछावर थी,
तुम खोए हुए थे कुदरत का नजारा देखने में,
हम खोए हुए थे बेनमुन सितारा देखने में,
दिल धड़का तुम्हारा जब बिजली जोर से कड़की थी,
दिल हमारा भी धड़का जब डर से तुम गले लग गए,
अक्सर देखा है हमने लडकियोंका यूं गभराना,
पर तुम तो मर्द होकर भी बिजली से डर गए,
पर वो डर तुम्हारा हमारी धड़कनोंमे बस गया,
ईश्क तुम्हारा यूं हमारे सीने में गड़ गया,
ना भूलेंगे हम वो बूंदों वाली रात,
जब बारिश के संग भगवानने बिखेरे थे ईश्क के जज़्बात।
B+Ve