नेता अभिनेता या प्रणेता किसी वेद का।
क्रेडिट हर बार उसको ही जाना चाहिए।
जनता हो अजनता हो या हो घुमंता कोई।
राग अनुराग उसके ही गुण गाइए।
एक एक वोटन की कीमत करोड़ राशि।
अंधा हो या लूला हो सब कोई लेके जाईए।
कल तक जो देखत नही थे सोझ नैनन से।
आज कहते है कुछ काम हो बताईए।
जिसको अछूत मान राह बदलते रहे
आज कहते है जरा हाथ से खिलाइए।
दोनो कर जोरी करे विनती निहोरी।
बस एक बार हमे मुख्यमंत्री बनाइए।
फिर बात हो विकास की विनाश की विश्वाश की।
ऐसी शिकायतों की गुहार न लगाइए।
मिलें 5 साल हाल अपना सुधारू या की गलियों में घूम घूम जनता को मनाऊं मैं।
पुलिस प्रशासन और बाबा जी का आसान है।
जो दर भाए आप वहां पे चले जाइए।
घूस से बने या बने मूस के दबाने से।
जैसी बने सुविधा वैसी देके आइए।
हम 5 साल खातिर , नही है जनम संग।
जियो और जीने दो का सूत्र अपनाइए।
लंबी लंबी छोड़ के , संभाल नही पाते है।
घर अस है की अंबानी भी फेल किहा।
और होम मेकिंग पॉलिसी में ज्ञान देने चले आते है।
ऐसे एक न अनेक हैं
बोले बिना ब्रेक है।
उल्टा सुलटा कुछ भी बलात बक जाते हैं।
खच्चर ज्यादा भार को सवार लेत नाही। जस।
ज्यादा ले लेत तो फिर फिसल के गिर जाते हैं।
अति उन्माद और कुसंगती के संग में ही।
सरकत सरकत कौनो कौनो जेल चले जाते हैं।
जेल में भी लोगन से करत गुहार वह की
एक बार हमे सिर्फ संतरी बनवाइए।
बीड़ी हो या पान हो तंबाकू सिगरेट दारू।
जो मन करे वो खुलम खुल्ला मंगवाएं।
ना कोई gst न ही कोई जुर्माना होगा।
ना ही ज्यादा काम और न ही कोई बर्डन। होगा।
चाहे जिससे खेलिए और खेल के चले जाइए।
लेकिन ध्यान रहे इतना जितना की भगवान में।
एक बार जितवाकर मुख्यमंत्री बनाइए।
Anand tripathi
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