“मैं वो काली हूँ जो न
बहारों में खिल सकीय
मैं वो काली हूँ जो न
बहारों में खिल सकीय
वो दिल हूँ जिसको प्यार
की मंजिल न मिल सकी
मंजिल न मिल सकी
पत्थर पे हमने फूल
चढ़ाए तो क्या किया
दिन में अगर चराग़
जलाये तो क्या किया
सब कुछ लुटा के होश
में आये तो क्या किया”
फ़िल्म: अेक साल
गायक: तलत महेबुब