हर रोज़ तुमको याद करते थे, तुम्हारी याद में हम शराब पीते थे।
पता है तुमको तुम हमको कब याद आती थी,
जब तुम अकेला खुद को पाती थी।
रातों में अचानक जग जाते थे हम,
उन रातों में जीना सीख रहे थे हम।
प्यार, गुस्सा, नाराज़गी, शर्माना, गुस्साना,
सब चलता रहता था ,
उसी के साथ साथ सब ढलता रहता था,
अकेले ही हम हस्ते रहते थे,
तुमसे मिलने की चाह में जीते रहते थे।
हर रोज़ तुमको याद करते थे, तुम्हारी याद में हम शराब पीते थे।
जिसदिन तुम हमसे दूर गई थी,
उस दिन मानो टूट से गए थे हम।
सहम से गये थे हम।
बीते थे पल जो हर एक तुम्हारे साथ,
वो सब याद बहुत आते थे।
क्योंकि हर रोज़ तुमको याद करते थे , तुम्हारी याद में शराब पीते थे।
पता है तुमको एक रात मुझको एक खबर मिली थी,
उस रात पता चला कि तुमको बेटी हुई थी।
सुन के ये बात मुझे खुसी तो बहुत हुई थी,
उस रात मेरे शहर में बरसात भी बहुत हुई थी।
धयान रखता है तुम्हारा वो देख कर हमको अच्छा लगता है,
मगर हमारे मन को अब कुछ अच्छा कहा लगता है,
मगर तुमको भुला तो नही पाएंगे हम,
तुम्हारी ज़िन्दगी से दूर हो जाएंगे हम।
और हर रोज़ तुमको याद करते थे हम, तुम्हारी याद में शराब पीते थे हम।