इक जलावे के अलावा कुछ नही है,
जैसे अलग अलग किरदार पर...
कहानी का अंत वही 'एक से सौ' के बाहर नहीं है।
लैला,रांजा,हिर,मजनु,
इन सबकी औकात उन कहानियों के बाहर कुछ नही है !
में जो भी लिखु जैसा भी लिखु, कोई समझे ना समझे,
अब मुझे मेरे अपने आप से बाहर कुछ नही है ! #MR