नशा - मुक्ति (दोहा - छंद)
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नशा मुक्त समाज बने, मिलकर ले संकल्प।
इसमे ना कुछ सार है, आयु करे ये अल्प।।
शराब , गांजा, औ चरस, करते जीवन नष्ट।
इसका सेवन जो करे, पाता हरदम कष्ट।।
नशा बुरी आदत बने, जीवन करे ख़राब।
सेहत को नुकसान दे, होती जहर शराब।।
हर जन जब जागृत बने, तब होगा ये काम।
नशा पता सब खत्म हो, होना इसका नाम।।
सभी मिल संकल्प करे, नशा मुक्त हो देश।
हर घर पर ये बात हो, पहुंँचे ये संदेश।।
Uma Vaishnav
मौलिक और स्वरचित