“बोए जाते है बेटे,
उग आती है बेटियाँ।
दीया जाता है खाद-पानी बेटों में,
लहलहाती है बेटियाँ।।
एवरेस्ट पर चढ़ने भेजे जाते है बेटे,
पर चढ़ जाती है बेटियाँ।
रुलाते है बेटे,
रोती है बेटियाँ।।
गिरते है बेटे,
लेकिन संभाल लेती है बेटियाँ।
बेटा है सम्मान,
तो हर माँ बाप का अभिमान होती है बेटियाँ।।” © जतिन त्यागी