रामायण भाग - 4
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सीता स्वयंवर (दोहा - छंद)
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जनकपुरी में राम जी, आये मुनि के संग।
झलक राम की देख कर,प्रजा रह गई दंग।।
जब सीता जी बाग में, आई सखियों संग।
रघुवर मन को भा गए, चढ़ा प्रेम का रंग।।
धनुष चढ़ाए राम जी, भूप रह गए दंग।
जनकराज हर्षित हुए , मिला सिया का संग।।
परशुराम क्रोधित हुए, जानी जब ये बात।
रघुवर ने मन शांत कर, कहे सब हालात।।
लक्ष्मण ब्याहे उर्मिला, भरत मांडवी संग ।
श्रुतकीर्ति शत्रुध्न बने ,इक दूजे के अंग।।
अवधपुरी में आ गए, लक्ष्मण सीता राम।
मंगल गाये मात ने, धन्य अयोध्या धाम।।
Uma Vaishnav
मौलिक और स्वरचित