रामायण भाग - 2
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बाल लीला (दोहा - छंद)
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बाल राम लीला करे, सुंदर उनका रूप।
राम लखन ऐसे लगे, जैसे दिव्य स्वरूप।।
ठुमक ठुमक कर प्रभु चले, घुँघराले हैं बाल।
सुन्दर सूरत राम की , गोरे गोरे गाल।।
कागा खेले साथ में , करते उनसे बात।
देखे लीला राम की,मात पिता दिन रात ।।
छम छम बाजे पेजनी , टेढ़ी मेढ़ी चाल।
बाल रूप में राम जी, लगते बड़े कमाल।।
Uma Vaishnav
मौलिक और स्वरचित