कुंडलियां - छंद
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पैसा बीना #कुछ_नहीं , मतलब के सब लोग।
बिन मतलब के भक्त भी, नहीं लगाते भोग।।
नहीं लगाते भोग , प्रभु से मांगते रहते।
पूरा हो हर काम , प्रभु से बस यही कहते।।
जानू ना ये बात , उमा ये पैसा कैसा।
देता नाते तोड़ , पास जब ना हो पैसा।।
उमा वैष्णव
मौलिक और स्वरचित