जब चाय और तुम मिल जाए,
एक दोस्ती का समा बंध जाए।
फिर हो इधर उधर की बाते अकसर,
दोस्तो के साथ पुरानी यांदों में खो जाए।
कभी होती है स्कूल की वो बाते,
तो कभी मस्ती की वो यादें।
घंटो बीत जाते अकसर दोस्तो के संग,
चाय पर ही तो होती है ऐसी मुलाकाते।
चाय ना जाने कितनो को मिलाती है,
अंजाने लोगों को पास ले आती है।
ना होती है जान ना पहचान,
चाय के संग अक्सर वही दोस्त बन जाते है।
जब भी कोई बात सताती है,
दोस्त कहे चल चाय पी कर आते है।
टेंशन ना जाने कहा गुम हो जाता है,
जब दोस्तों के संग एक चाय हो जाती है।
जब भी हम और तुम मिल जाए,
मिलने के बहाने थोड़ी चाय हो जाए।
जब चाय और तुम मिल जाए,
एक दोस्ती का समा बंध जाए।