“जब हम रो नहीं पाते, सुख से सो नहीं पाते।
जब हम खो नहीं पाते, अपना बचपन याद आता है।।
जब चिंता सताती है, हमारे तन को खाती है।
जब भी मन नहीं मिलता, तब बचपन याद आता है।।
जब हम टूट जाते हैं, जब अपने रूठ जाते हैं।
जब सपने सताते हैं, तब बचपन याद आता है
बच्चे रह नहीं जाते, बड़े हम हो नहीं पाते।
खड़े भी रह नहीं पाते, तब बचपन याद आता है।।”