प्रभाती - दोहे
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नव प्रभात अब आ गया, मानव आँखे खोल।
मात पिता को नमन कर, मुख से हरि हरि बोल।।
भोर नमन हरि को करे , फिर हम खोले नेत्र।
कण कण में हरि है बसे, कोई भी हो क्षेत्र।।
सूर्य किरण फैली उमा , बीत गई है रात।
उदित सूर्य की लालिमा, लाई नई प्रभात।।
Uma Vaishnav
मौलिक और स्वरचित