बंशी (दोहा - छंद)
*****************
बजती बंशी जब श्याम की, गूंजे धुन सब ओर।
गाय ग्वाल सब उठ गये , आई सुन्दर भोर ।।
बोले राधा श्याम से , हे मोहन घनश्याम।
बंशी की धुन जब सुनी, भूली सारे काम।।
मोहन बंशी संग ले, आना जमुना तीर।
श्याम दर्श की लालसा , लोचन बरसे नीर।।
Uma Vaishnav
मौलिक और स्वरचित