दोहा - छंद
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शाम हुई पंछी चले, अपने घर की ओर ।
सूरज भी अब ढ़ल गया, आये घर सब ढोर।।
मंदिर मंदिर गुम रहा, ह्रदय पटल तो खोज।
यही राम का वास हैं, दर्शन करले रोज।।
राम नाम का भजन कर, सुबह शाम दिन रात।
नाम यही जग में बड़ा, मानले मेरी बात।।
Uma Vaishnav
मौलिक और स्वरचित