मैं संगीत हूँ तुम तान हो, मन की मधुर मुस्कान हो।
मैं देह हूँ तुम जान हो,तुम जीवन की पहचान हो।।
तुम आन हो तुम बान हो,तुम शान हो स्वाभिमान हो।
तुम राह हो तुम लक्ष्य हो,तुम ही गती उपलक्ष्य हो।।
तुमसे बना जीवन मेरा,तुमसे सजा मधुवन मेरा।
तुम हास हो परिहास हो,तुम संग की आभाष हो।।
लिपटा तुम में मन है मेरा,तेरे प्रेम रुप का है चेरा।
तुम मेरी रंग सुनहरी हो,बाहर-भीतर की प्रहरी हो।
तुममें ही रहूं आबाद सदा,तुम मेरी प्रीत घनेरी हो।।
मन मंदिर की तुम मुरत हो,हरपल रहती वो जरूरत हो।
तुम सुबह मेरी तुम दुपहरीया,तुम सांझ मेरी तुम आज मेरी।।
जीवन की साजो-सामान मेरी।
तुम ईश्वर का वरदान मेरी।।
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