यादों के सिवा और रख्खा क्या है ,
और कुछ हो तो बताओं जरा ,
निभाना है ख्वाब जो आँसुओं तले ,
तो झूठी मुस्कान ही सही क्यों न हो बताओं जरा |
खुद हँस न सके न सही यह अन्तर सही , किसी की मुस्कान का जरिया बन जाऊँ न क्यों, बताओं जरा ||
माँगा न सिवाय इसके खुदा से तुम , जैसा चाहते हो
बन जाऊँ मै , की जो मोहब्बत ,तो, निभाऊँ क्यों न बताओ जरा ||