देव - घनाक्षरी
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जमुना के तीर आये, गोपियाँ ये गीत गाये।
पायल ये छनकाये, देखो छन छन छनन ।।
बृज में आंनद छाया, मेघा जल बरसाया।
गरज गरज करे, देखो घन घन घनन।।
श्रीकृष्ण की बंसी बजे, मधुर सी धुन बजे।
ठण्डी हवा जब चले, देखो सन सन सनन।।
श्रीकृष्ण की सारी माया, प्रभु ने खेल रचाया।
सब मिल करते हैं, आओ श्रीकृष्ण को नमन।।
उमा वैष्णव
मौलिक और स्वरचित