प्रेम मृत्यु ही है मृत्यु का अर्थ देहिक समाप्ति किन्तु वास्वतविक जीवन यहीं से शुरू होता है | जब मनुष्य के कर्म सारे बराबर हो जाते है या कभी रीझकर भी विशेष कृपा स्वरुप परमात्मा यह भाव देता है | यह एक मौका उसके मिलन का यहाँ थोड़ी जगह मनुष्य को विवेक पर छोड़ देता है वह इस प्रेम का उपयोग किस प्रकार करता है |
#प्रेम_परमात्मा