कहते थे तुम हृदय हूँ !
मै जीवन का तुम्हारे उदय हूँ,
उद्देश्य हूँ , कर्म हूँ ,
जीवन का मर्म हूँ ,
तुम्हारे लिए ही तो आया हूँ !
मै तुझमे ही समाया हूँ |
पहले तो कोई शर्त न थी ?
आज शर्तो की कसौटी पर मै,
आधारहीन हो गई ?
क्या जीवित नही हूँ प्राणहीन हो गई?
क्या सजा दोगे तुम मुझे और !
दिखाओगे नाराजगी ?
क्रमश: