भाई - बन्धु (दोहा - छंद)
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भाई बंधु साथ रहे , उनसे ना हो बैर।
हरदम भाई साथ हो, रखना सब की खैर।।
अपने सारे साथ हो , रखे सभी से प्रीत।
बाधा आए फिर नहीं, मिलती है बस जीत।।
जीत उसी की हो सदा, अपने जिसके साथ।
हर मुस्किल में साथ हो, थामे रहते हाथ।।
उमा वैष्णव
मौलिक और स्वरचित