*"सब की मंगल कामना के साथ सुंदर सुबह की मधुर नमस्कार ।।*
सभी स्नेही "स्वजनों" का हर पल मंगलमय हो साथ ही आज जन्मदिन वाले सभी स्नेही स्वजनों के लिए *अखंड भारत सनातन संस्कृति* की ओर से ढेरो शुभकामनाएं बधाई....
अहङ्कारं बलं दर्पं कामं क्रोधं परिग्रहम्।
विमुच्य निर्ममः शान्तो ब्रह्मभूयाय कल्पते॥
- श्रीमद् भगवद्गीता १८/५३
*अर्थात :- अहंकार, बल, दर्प, काम, क्रोध और परिग्रह को त्याग कर ममत्वभाव से रहित और शान्त पुरुष ब्रह्म प्राप्ति के योग्य बन जाता है।