ज़िंदगी... तुम बिन अधूरी सी है...
जब तक ये टूटे पत्ते मिट्टी में नहीं मिल जाते...
ये बारिश की बूँदे धरती के अंदर नहीं समा जाती...
ये नदियों का पानी समुन्दर के आख़िरी छोर तक नहीं पहुँच जाता...
बस तब तक मुझसे इश्क़ करना...
क्योंकि... ये ज़िंदगी... तुम बिन अधूरी सी है...
जब तक ये झूले जंग लगने की वजह से झुलाना बंद नहीं कर देते...
ये हवायें तुम्हारे बालों को छूकर जाना रोक नहीं देती...
ये ख़ामोश पड़ी वादियाँ बोलना शुरू नहीं कर देती...
बस तब तक मुझसे इश्क़ करना...
क्योंकि... ये ज़िंदगी... तुम बिन अधूरी सी है...
-स्मृति