क्यों दोष लगाता है नाहक ,
तुझसे तो कुछ था छुपा नही ,
मै प्रथम समर्पित ,माँ ,गुरूवर |
तुझमे भी देखा रूप वही ,
ब्रम्हा, विष्णु, शंकर जिनसे ,
तू अगल कहाँ का कंकर है ,
मै रेत भले ही कंकर हूँ ,
शिवगामी के चरणों की ,
जब मेरा मुझमे है ही नही तो वादा,
कैसे है मेरा जिसकी इच्छा से वादे है,
बस वही तो उसको साधे है |