0️⃣7️⃣0️⃣3️⃣2️⃣2️⃣सात मार्च दो हज़ार बाइस । सोमवार । शुभ समय ।वसंत ऋतु ।
(१) क्या बेच कर खरीदें तुझे ए फुर्सत, सब कुछ तो गिरवी पड़ा है इस ज़िम्मेदारी के बाज़ार में ।
(२) सबको खुश रखना, ज़िंदा मेंढकों को तोलने जैसा है, एक को बिठाओ तो दूसरा कूद जाता है ।
(३) जीवन सामान्य रूप से बीत जाए, ये बहुत ही असामान्य बात है !
(४) अगर मुस्कराहट के लिए ईश्वर का आभार नहीं माना तो आंखों में आए आंसुओं के लिए प्रभुजी से शिकायत क्यों ?
(५) उस लम्हे को बुरा मत कहो जो आपको ठोकर पहुंचाता है अपितु उस लम्हे को याद करो जो आपको जीने का अंदाज़ सिखाता है ।
(६) प्रतिदिन सूरज यह बताने के लिए निकलता है कि उजाले बांटने से उजाले कम नहीं होते ।
(७) आलस्य, ऐसा सुख है जिसका परिणाम दुःख है !
घर में रहें सुरक्षित रहें ।
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