1️⃣8️⃣0️⃣2️⃣2️⃣2️⃣ अट्ठारह फरवरी दो हज़ार बाइस। शुक्रवार । शुभ समय । वसंत ऋतु प्रारंभ ।
(१) समय और स्थिति कभी भी बदल सकतीं हैं अत: कभी किसी का अपमान मत करो ।
(२) बुरा समय आपको जीवन के उन सत्यों से अवगत कराता है जिनकी अपने अच्छे समय में कभी कल्पना भी नहीं होती ।
(३) मौन और मुस्कान, दोनों का प्रयोग कीजिए क्योंकि मौन रक्षा कवच है तो मुस्कान स्वागत द्वार ।
(४) रिश्ते भी इमारत की तरह होते हैं, हल्की सी दरार भी आजाये तो ढहते नहीं अपितु मरम्मत करते हैं ।
(५) इंसान को कभी अपने समय पर अभिमान नहीं करना चाहिए; ये ज़िंदगी है साहेब, छोड़कर चली जाएगी और मेज़ पर होगी तस्वीर और कुर्सी खाली रह जाएगी !
(६) आशा भले ही छोटी हो परंतु निराशा से बेहतर होती है ।
(७) अहंकार न पालिए जनाब, वक्त के समंदर में कई सिकंदर डूब चुके हैं ।
घर में रहें स्वस्थ रहें ।।
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