श्रीकृष्ण के प्रेम मे व्यथित मीरा की मनोदशा का वर्णन श्रृंगार रस के माध्यम से ।
जब से ओढ ली मैने
चुनर तेरे नाम की
जब से ओढ ली मैने
चुनर तेरे नाम की
तब से रही ना कान्हा
मै किसी काम की -2
मुझको लगा है जब से
रंग तेरी प्रीत का
मुझ पे चढा ना कोई
रंग और मीत का-2
बंसी की धुन से पागल
चली आ रही हूँ
मै तो तुझसे कान्हा
तेरी गली आ रही हूँ-2
जब से लग गई मुझको
लगन तेरे नाम की
मैने छोड दी दुनिया
मै तो सिर्फ श्याम की-2
जब से ओढ ली मैने
हाँ हाँ ओढ ली मैने
चुनर तेरे नाम की
तब से रही ना कान्हा
मै किसी काम की।-2
जय हो मुरलीधर मेरी कलम को आशीष प्रदान करे।
मीरा सिंह