*राष्ट्ररक्षासमं पुण्यं, व्रतम्, यज्ञो, दृष्टो नैव च नैव च।।*
अर्थ- राष्ट्र रक्षा के समान कोई पुण्य नहीं, कोई व्रत नहीं, कोई यज्ञ नहीं।
*धर्मो रक्षति रक्षितः*
अर्थ- "धर्म की रक्षा करो, तुम स्वतः सुरक्षित हो जाओगे, अर्थात राष्ट्र भी सुरक्षित हो जाएगा।"
आप सभी को *#गणतंत्रदिवस * की हार्दिक शुभकामनाएँ।
जयतु जयतु हिन्दुराष्ट्रम् ।
🚩जय सियाराम जी🇮🇳🚩