एक दिन तुम अपने दुपट्टे से
उन हाथों को कस के बाँध देना
जो ट्रेनों में, बसों में, दफ़्तर में और घरों में
तुम्हारी तरफ़ बढ़ते हैं।
एक दिन तुम अपने दुपट्टे से उन लोगों का गला घोंट देना
जो तुम्हारा दुपट्टा खींचते हैं।
एक दिन तुम अपने दुपट्टे से
उस सोच को फाँसी दे देना
जो तुम्हें दुपट्टा ओढ़ने पर मजबूर करती है।
एक दिन तुम अपने दुपट्टे को उस चिता में जला देना
जिसमें समाज के नियमों की लाश हो
और आज़ाद हो जाना
हमेशा के लिए दुपट्टों से भी और ख़ुद के शरीर से भी।
#Azadi