कुछ अल्फाज़ इस दौर के नाम
समय के चक्रव्यूह ने मनुष्य को खुद को परखने का मौका दिया
जिसने उसके अभिमान को नीचोड दिया,
क्या पता था कुदरत के गरुर ने लोगों की जिंदगी की तकदीर को बदल के रख दिया।
ना बीते लम्हे याद आते हैं
ना गुज़रता वक़्त हालात बयान करता है
जिस्म कांप जाते हैं जब हालात खुद वक्त का नजरिया बन कर सामने आता जाते है।
जब पर्वत ने छूआ बदलों को
तब धरती पर बरसा पानी है
जिस दिन प्रलय की आहट हुई
तब इंसान समझा की मेरी परछाई भी पानी है।
कदर ना की उस समय की
जब हर इंसान बेबस हो गया
जब खुदा ने खुद इंसान से कहां
की तेरा निगेबान तेरा साया ही हो गया।
अपनो को अपनो से दूर कर दिया
जब इंसानियत की शान पर दाग आया
कर रहे हैं सब मिलकर काम
लेना है सबको सिर्फ एक ही रब का नाम।
माला में मोती है जो हूर की सौंदर्यता से परे हैं
चांद में नूर है जो हमसे कोसो दूर है
सफलता भी एक सफर है जो हम जिंदगी के हर स्वाद देता है
वो जमाना क्या था जब दोस्तों का याराना कुछ और था।
न मोह न कोई सौदा कम आया
जिंदगी के हर पल ने हमे कुछ सिखया
की कुदरत के गरूर ने हमारी तहज़ीब को तकदीर के नाम लिख दिया।