Hindi Quote in Poem by Sudhir Srivastava

Poem quotes are very popular on BitesApp with millions of authors writing small inspirational quotes in Hindi daily and inspiring the readers, you can start writing today and fulfill your life of becoming the quotes writer or poem writer.

परछाईं
*******
वक्त कितना भी बदल जाये
हम कितने भी आधुनिक हो जायें,
कितने भी गरीब या अमीर हों
राजा या रंक हों
नर हो या नारी हों
परछाईं हमारी आपकी अपनी है।
सबसे करीब सबसे वफादार
साथ नहीं छोड़ती,
हम चाहें भी तो भी नहीं
मरते दम तक साथ निभाती है,
हमारे साथ चिता तक जाती
हमारे शव के साथ जलकर
हमारे शरीर का अस्तित्व मिटने के साथ
हमारी परछाईं मिट जाती
अपना वजूद खो देती।
मगर विडंबना देखिये
हमसे कुछ नहीं पाती
न ही कुछ चाहती है
परंतु हमारा साथ पूरी निष्ठा से निभाती
पर छाईं होकर भी
हमारे वजूद से हमेशा चिपकी रहती
हर कदम पर साथ देती
हमारी अपनी परछाईं।
● सुधीर श्रीवास्तव
गोण्डा, उ.प्र.
8115285921
© मौलिक, स्वरचित

Hindi Poem by Sudhir Srivastava : 111776354
New bites

The best sellers write on Matrubharti, do you?

Start Writing Now