भोजन की थाली
भोजन की थाली में अन्न को,
कभी भी नहीं छोड़ना चाहिए।
जितना भोजन ग्रहण करना है,
उतना ही हमें तो लेना चाहिए।
अन्न का अपमान करता है जो,
वो घोर निंदा का अधिकारी है।
तरसेगा वो इसी जन्म में,
मां अन्नपूर्णा का जो अपराधी है।
जितना खाना है उतना ही लेना है,
यही एक सत्पुरुष का संस्कार हैं।
कम भोजन में ही संतुष्ट हो जाना,
यही तो महापुरुषों का प्रमाण है।
किरन झा मिश्री
-किरन झा मिश्री