प्रिय निंद,
रात को जल्दी से आती नहीं,
सुबह को जल्दी से जाती नहीं।
दीन भर काम से थके हारे आते है,
तो चुटकी में आ जाती है।
बच्चों को बहुत ज्यादा आती हो,
बूढ़े लोगों को थोड़ा कम आती हो।
युवाओं तो सिर्फ बहाना चाहिए,
किसे भी करके सोने का।
तुम आती हो और सपनों में ले जाती हो,
हकीकत में पूरे ना हो पायें
ख्वाबों को सपनों में पूरा कर जाती हो।