Hindi Quote in Poem by Sudhir Srivastava

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नववर्ष की चुनौतियां और तैयारियां
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नववर्ष के साथ नयी नयी
चुनौतियां भी कम नहीं है,
ओमीक्रान पहले से ही डरा रही है,
राजनीति का पराभव
किसी खतरे से कम नहीं है,
नेताओं के बिगड़ते बोल
देश की मानसिकता दूषित कर रहे हैं,
स्वार्थ में अंधे नेता
देश के लिए जोंक से कम नहीं हैं।
अराजकता और आतंकवाद फैलाने के
खतरे बरकरार हैं,
देश को अस्थिर और कमजोर ही नहीं
षड्यंत्र कर देश को हर स्तर पर
नीचा दिखाने का प्रयास करते रहने वाले
देश में कथित रहनुमा भी कम नहीं हैं।
नारियों का भय आज भी बरकरार है
हर बात पर सरकार पर
आरोप लगाने वालों की भरमार है।
संसद विधानसभाएं अखाड़ा सी
अब लगने लगी हैं,
जनता के धन पर बेशर्मी से नृत्य की
जैसे रीति बन गयी है।
बेरोजगारी डरा रही है,
बढ़ती जनसंख्या भारी पड़ रही
जनसंख्या नियंत्रण चुनौती है,
जनसंख्या नियंत्रण बिल
अभी टेढ़ी खीर लगती है।
अल्पसंख्यक बहुसंख्यक का खेल
खतरनाक हो रहा है,
लगता है जैसे हमारे लोकतंत्र को
हर दिन डरा है,
समस्याएं स्वास्थ्य, शिक्षा की भी
अभी कम नहीं हैं,
हमारी सरकारें प्रयास भी
कम नहीं कर रही हैं।
संवैधानिक संस्थाओं पर हमले
हमारी व्यवस्था को मुँह चिढ़ा रहे हैं,
तैयारियों पर चुनौतियां भारी पड़ रही हैं।
देश की अर्थव्यवस्था को
मुँह चिढ़ा रही हैं।
हम भी कम नहीं हैं
सुविधाएं सरकार से सब चाहते हैं
साथ ही सरकार की राह में
रोड़े अटकाने में पीछे कहाँ हैं?
चुनौतियों और तैयारियों का
कोई मेल नहीं है,
बाहर भीतर की कैसी भी चुनौतियां
सरकार हर चुनौती से निपट सकती है मगर उसकी हर तैयारी में
हम आप ही नित नयी
दीवार बन रहे हैं,
देश के विकास में काँटे बिछा रहे हैं।
● सुधीर श्रीवास्तव
गोण्डा, उ.प्र.
8115285921
©मौलिक, स्वरचित,

Hindi Poem by Sudhir Srivastava : 111774618
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