बावजूद इसके !!
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तमाम पीड़ाओं के बावजूद
उनीदी आँखों में भरते रहे स्वप्न
छूटने के व्यर्थ प्रयास में
होती रही जकड़न
और अधिक --अधिक
कठोर -- होते रहे अनुबंध
बहुत सारे फफोले थे
जो दफ़न थे कहीं
सीने की गहराइयों में
अनेक कोशिशों के बावजूद
फूटते रहे --देते रहे पीड़ा
अंतर्वेदना की मुहर से चिपके
सोचा ,साझा कर लूँ -----
डॉ.प्रणव भारती
शायद कुछ कम हो जाए पीड़ा --
घूमते रहे ताउम्र
शर्त यही रही
जीना होगा उनके साथ ही
कहीं सिमटी हुई
तन्हाइयों में