माता सती के १०८ पवित्र स्थल
दक्ष यज्ञ में मातासती के जल कर मर जाने के बाद बदहवास भगवान शिव ने जब सती के मृत शरीर को उठाकर अंतरिक्ष में ब्रह्माण्ड उद्वेलित करने वाले अति उग्र एवं भयावह नृत्य शुरू किया तों समस्त चराचर सर्वनाश के कगार पर पहुँच गया. तब भगवान विष्णु ने देखा कि अब समय आ गया है कि जो वरदान भगवान शिव ने माता सती को यंत्र निर्माण के लिये दिया था उसके पूर्ण होने का समय आ गया है. तब उन्होंने पहले साम्ब सदाशिव को अपने हृदय में आवाहित किया. मानस पूजा किये. और फिर मातासती एवं भगवान शिव से अनुमति प्राप्त कर चक्र उठाया तथा माता सती के शव को एक सौ आठ टुकड़ो में काट कर बाँट दिया. ये एक सौ आठ टुकडे ही पृथ्वी पर एक सौ आठ स्थानों पर गिरे. तथा इन्ही स्थानों से एक सौ आठ यंत्रो का आविर्भाव हुआ. इस प्रकार यंत्रो क़ी संख्या एक सौ आठ ही सिद्ध होती है.
वाराणस्याम विशालाक्षी नैमिषे लिंगधारिणी |
प्रयागे ललिता देवी कामाक्षी गंधमादने ||
मानसे कुमुदा नाम विश्वकाया तथाम्बरे |
गोमंते गोमती नाम मन्दरे कामचारिणी ||
मदोत्कटा चैत्ररथे जयन्ती हस्तिनापुरे |
कान्य कुब्जे तथा गौरी रम्भा मलयपर्वते ||
एकाम्रके कीर्तिमती विश्वे विश्वेश्वरीम विदुह |
पुष्करे पुरुहुतेति केदारे मार्ग दायिनी ||
नंदा हिमवतः पृष्ठे गोकर्णे भद्रकर्णिका |
स्थानेश्वरे भवानी तू बिल्वके बिल्वपत्रिका ||
श्री शैले माधवी नाम भद्रा भद्रेश्वरे तथा |
जया वराहशैले तू कमला कमलालये ||
रूद्रकोट्यम च रुद्राणी काली कालान्जरे गिरौ |
महालिंगे तू कपिला मर्कोटे मुकुटेश्वरी ||
शालग्रामे महादेवी शिवलिंगे जलप्रिया |
मायापुर्याम कुमारी तू संताने ललिता तथा ||
उत्पलाक्षी सहश्राक्षे कमलाक्षे महोत्पला |
गंगायाम मंगला नाम विमला पुरुषोत्तमें ||
विपाशायाममोघाक्षी पाटला पुंड्र वर्धने |
नारायणी सुपार्श्वे तू विकूटे भद्रसुन्दरी ||
विपुले विपुला नाम कल्याणी मलयाचले |
कोटवी कोटतीर्थे तू सुगंधा माधवे वने ||
कुब्जाम्रके त्रिसंध्या तू गंगा द्वारे रतिप्रिया |
शिवकुंडे सुनंदा तू नंदिनी देविका तटे ||
रुक्मिणी द्वारावात्याम तू राधा वृन्दावने वने |
देविका मथुरायाम तू पाताले परमेश्वरी ||
चित्रकूटे तथा सीता विन्ध्ये विंध्यवासिनी |
सह्याद्रावेकवीरा तू हरिश्चंद्रे तू चंद्रिका ||
रामणाम रामतीर्थे तू यमुनायाम मृगावती |
करवीरे महालक्ष्मीरुमादेवी विनायके ||
अरोगा वैद्यनाथे तू महाकाले महेश्वरी |
अभयेत्युष्ण तीर्थेषु चामृता विन्ध्य कन्दरे ||
मान्दव्ये मांडवी नाम स्वाहा माहेश्वरे पुरे |
छागलांडे प्रचंडा तू चंडिका मकरंदके ||
सोमेश्वरे वरारोहा प्रभासे पुष्करावती |
देव माता सरस्वत्यां पारावारतटे मता ||
महालये महाभागा पयोष्ण्याम पिन्गलेश्वरी |
सिंहिका कृतशौचे तू कार्तिकेये यशस्करी ||
उत्पलावर्तके लोला सुभद्रा शोणसंगमे |
माता सिद्धपुरे लक्ष्मीरंगना भरताश्रमे ||
जालन्धरे विश्वमुखी तारा किष्किंध पर्वते |
देवदारु वने पुष्टिर्मेधा काश्मीर मंडले ||
भीमादेवी हिमाद्रौ तू पुष्टिर्विश्वेश्वरे तथा |
कपाल मोचाने शुधिर्माता कायावरोहणे ||
शंखोद्धारे ध्वनिर्नाम धृतिः पिण्डारके तथा |
काला तू चन्द्रभागायामच्छोदे शिवकारिणी ||
वेणायाममृता नाम बदर्यामुर्वशी तथा |
औषधी चोत्तरकुरौ कुशद्वीपे कुशोदका ||
मन्मथा हेमकूटे तू मुकुटे सत्यवादिनी |
अश्वत्थे वंदनीया तू निधिर्वेश्रवणालये ||
गायत्री वेदवदने पार्वती शिवसंनिधौ |
देवलोके तथेंद्राणी ब्रह्मास्येषु सरस्वती ||
सूर्यबिम्बे प्रभा नाम मातृणाम वैष्णवी तथा |
अरुंधती सतीनाम तू रामासु च तिलोत्तमा ||
चित्ते ब्रह्मकला.नाम शक्तिः सर्व शरीरिणाम |
एतदुद्देशतः प्रोक्तं नामाष्टशतमुत्तमं ||
अष्टोत्तरम च तीर्थानाम शतमेतदुदाहृतम |
यः पठेच्छ्रीणुयादवापि सर्वपापैह प्रमुच्यते ||